Posts

श्रीदेवी के सम्मान म

Image
महानदी तैं कहाँ चले हस हस्ती ल मोर उजार के संग म ले जा आवत हौं बहिनी डोला अपन सिंगार के बड़ सुख देइस बाग बगैचा ये आमा के डारा ह रात पहागे कहत हवे चलो- चलो ये पारा ह घोड़ा- हाथी सजय बराती गली म हांका पार के टूटत हे गस्ती , छूटत हे बस्ती राम रमउवा होवत हे बड़ भुरभुरही माटी के ममता कोरी चकोरी रोवत हे मोर सुध सजन संग लागे हे का करिहौं आँसू ढार के  अलविदा - सा. के. आर. मार्कण्डेय ,छत्तीसगढ़

रायपुर हमर राजधानी

Image
चल चलना वाे रायपुर जाबो बड़ सुन्दर हे बाग बगीचा किंजर के दुनो आबो चल चलना वो रायपुर जाबो मोटर मंगावंव के गाड़ी म जाबो जादा नइये दूर नवा सड़क हे , नवा सवांगा नवा बसे रायपुर हमु देखि आबो वो दिल्ली कस सिंगार करत हे हमर ये राजधानी इन्द्रावती अउ महानदी के धरे हे नाम निशानी हमु देखि आबो वो ऊँचा- ऊँचा भवन बने हे रहि- रहि गगन छुवत हे फिटिक अंजोरी दुधिया- दुधिया चंदा- चंदैनी उवत हे हमु देखि आबो वो मंत्री मन के दर्शन करबोन मुख्य मंत्री के संग म राजा- परजा दुनो रंगे हे छत्तीसगढ़ के रंग म हमु भेंटि आबो वो - सा. के. आर. मार्कण्डेय

लक्ष्मण तोर संग चले म घाटा होगे

Image
लक्ष्मण तोर संग चले म घाटा होगे बड़े- बड़े मोर तरिया- नदिया बांटा होगे कतेक बड़े मोर डोली धनहा जेकर तुमन रेहेव किसनहा जे दिन तैं बने नंगरिहा लाटा होगे देख आज तोर खरतरिहा मन बर गाँव नंदागे गंवतरिहा मन बर मनखे- मनखे बर चांटा होगे अंग- अंग म मोर फोरा होगे जुच्छा धान कटोरा होगे पग- पग बिखहर कांटा होगे कहाँ हवे तोर सरग निशैनी फूले-फरे म लागिस मैनी चूहरी, कन्हार-मटासी, लक्ष्मी ठाठा होगे दया- मया तोर गाँव म नइये जुड़- शीत तोर छांव म नइये सबे काम म भरती भाजी-भांटा होगे दारू के नित गंगा बोहिगे पापी ल जादा धरमी तरगे आधा रात म चंदा सूमो टाटा होगे कहाँ- कहाँ के मोटरा आ गे पुरुत- पुरुत के पांव बंधागे घर भीतरी म हमर सबके सैर सपाटा होगे झन गाबे तैं गीत कहुं मेर सुनता के डांडिया रास रचावन दे बात करन दे बिनता के परे- डरे तोर मनखे जम्मो नाठा होगे - सा. के. आर. मार्कण्डेय रचना दिनांक ०७.१०. २००६

श्री ताराचन्द साहू संगे चरण मनाबो गुरू घासीदास के

Image
श्री ताराचन्द साहू तुम घूम फिर आहू संगे चरण मनाबो गुरू घासी दास के माटी के काया , माटी के चोला हे एक दिन बिराना , होना सबोला हे नइ समझेंन , तुम समझाहू संगे ....... गर्भवास म भक्ति कबूलेन नइ जानेन हम , जगति म भूलेन वोहि भक्ति के जोत जगाहू संगे .......... बालक पन हम खेल गंवायेन कूद- कूद खेलेन , नइ पढ़ पायेंन करण सुआ कस  पढ़ाहू संगे ........ आये जवानी , रंग म मातेन अतका मातेन , करजा ल लादेन करजा ल मुक्ति करवाहू संगे ........ आइस बुढ़ापा , बांह होगे ठुठवा पीरा सचरगे , कांपत हे घुठवा तन के व्याधि हरवाहू संगे आशा के तुम अमरित घोरेव तन ल तियागेव , धन ल छोड़ेव ये भुइंया ल तुम्ही जगाहू संगे ......... - सा. के. आर .मार्कण्डेय स्वर्गवास - 11.11. 2012  रचना दिनाँक 14.11. 2012

गुरू घासी तोर बानी अमरित

Image
गुरू घासी तोर बानी अमरित हे हाका पार के बलाथे सरी दुनिया ल सतनाम के अधार तुम जग ल दियो जीव जगत ल तुम अभय करेव चेचकार के रेंगायेव सरी दुनिया ल कोनो ल तुम छोटे- बड़े कभू नइ मानेव सबे ल अपन सम मनखे जानेव ललकार के बतायेव सरी दुनिया ल दया- मया एके राखेव तुम मन में बैर के बइरी बंधना टोरेव एक क्षिण में दुलार के बलायेव सरी दुनिया ल - सा. के. आर. मार्कण्डेय

गुरू घासी के बचन सिर धार ले

Image
गुरू घासी के बचन  सिर धार ले धरती ल अपन सिंगार ले तोर मेर मोती हे तोर मेर सोना हे गौंसर खेती हे खेती ल बोना हे नागर धर उपजार ले छोटे- बड़े सब मिल ताकत लगाना हे छाये हे गरीबी वोला दुरिहा भगाना हे तोर संग सबो ल तियार ले रसता सुघर तोर चांदी जइसे होना ग सुविधा सफर सब बांदी जइसे होना ग सब ल बने चतवार ले चलत हे दलाली तुम धरती ल बेचो झन कहाँ जाहू काली तुम काली ल मेटो झन कोरी दू कोरी बिचार ले _ सा. के. आर. मार्कण्डेय

गिरौदपुरी मेला - संतो का मिलन

Image
जोग नदिया म पुलिया बना दे बबा हमु आवत हवन टिकिस लगा दे बबा तोरे तपोभूमि बाबा सुध हमर लामे हे एके ठन अधारा हम ला दुनिया म थामे हे सरी दुनिया के संत मिला दे बबा जिये हन बछर दिन आ गे तोर परब ह माई- पिल्ला आवत हन करबो दरस ल असो दूर- दूर हाँका परा दे बबा उमड़े हे नर- नारी बाबा दिखत हवे रेला ह मोटर गाड़ी गज- गज होगे बाढ़े हवे मेला ह टोल पसरा ल अऊ  बढ़हा दे बबा - सा. के. आर. मार्कण्डेय ( गिरौदपुरी मेला प्रारम्भ २० फरवरी २०१७  )