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मन के मंदिर म तोला बइठारौ

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मन के मंदिर म तोला बइठा के ये मोर गुरू हो साहेब भंव - भंव आरती उतारंव

तुम बइठो गुरू आसन म

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तुम  बइठो गुरू आसन म साहेब तोर आसन लगे गायिका - उ षा बारले

अइसे गुरू वाणी हमारा हे

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सतनाम धरम हमला प्यारा हे ये दीन- दुखीन के सहारा हे दुसर सहारा ल देखि डारेन चौबीस अवतारा ल देखि डारेन ये सब दूर किनारा हे ये मनखे के गरिमा नइ जानिन हम ला कभू मनखे नइ मानिन छुआ-छूत बिस्तारा हे सतनाम धरम के कहना हे दुनिया म कहुं ल नइ रहना हे फेर नेह समुंद क्यों खारा हे सतनाम धरम सब ल कहिथे दुनिया म सबो के जश रहिथे अइसे गुरू वाणी हमरा हे - सा. के. आर. मार्कण्डेय

गुरू घासी दास जी

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गुरू घासी दास जी तोर चरणों में हमर विनती हे झन टूटे आस जी तोरअपनो के अतके अरजी हे गर म अपन हम सबे ल लगाथन संग म अपन हम सबे ल रेंगाथन ऩइ मिले रास जी दुःख ल अपन हम सब ल देखाथन मन के दरद घलो हँस के बताथन बन जथे फाँस जी सत म केहे ते हम सते गोठियाथन पुतकी असन झार झूठ ल भगाथन इहि हवे खास जी - सा. के. आर. मार्कण्डेय

हमर गुरू के जयंती ल निकाले नकुल ढीढी

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तैं थके हारे लोग सम्हाले नकुल ढीढी हमर गुरू के जयंती ल निकाले तैं हम ला बनाये बल वाले नकुल ढीढी हमर गुरू के जयंती ल निकाले गुरू घासी दास के महिमा ल जाने तैं गिरौदपुरी के कीरति बखाने तैं वोला धरे हे दुनिया वाले सन् १९३८ म जयंती मनाये तैं ग्राम भोरिंग म सब ल बलाये तैं जेला देखिन दुनिया वाले रचना  -  सा. के. आर. मार्कण्डेय गायिका - श्रीमती उषा बारले

गुरू घासी दास जयंती ल मनावत हे नकुल ढीढी

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गुरू घासी दास जयंती ल मनावत हे नकुल ढीढी सोये- सोये बघवा जगावत हे नकुल ढीढी रचना- सा. के. आर. मार्कण्डैय

वीर बलिदानी गुरू बालक दास

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वीर बलिदानी गुरू बालक दास तोर वन्दना हे आज तुम्ही हमर धरती तुम्ही आकाश तोर वन्दना हे आज समाज  शहादत के याद में रैली लेकर निकल पड़ा है ३.०० बजे खम्हरिया , धनोरा जिला दुर्ग ,छ.ग. में स्वागत कार्यक्रम होगा स्मृति गीत सुने संयुक्त रचना -  के.आर. मार्कण्डेय एवं श्री यशवन्त सतनामी