आरती संत समाज साहेब तुंहर आरती हो

आरती संत समाज साहेब तुंहर आरती हो
सदा करिहौ एक अवाज साहेब तुंहर आरती हो

तुंहर चरण म गंगा बोहत हे
सरी दुनिया के जे मइल धोवत हे
तुम राखेव सबके लाज साहेब तुंहर आरती हो

तुंहर भरोसा हम बल गरजतहन
पाके सहारा हमु मन हरषत हन
सबे विपदा टरगे आज साहेब तुंहर आरती हो

जग के जहर- महुरा पग - पग धोये हव
सत के डगर वाला अमरित बोये हव
तुम अधरे म रोकेव गाज साहेब तुंहर आरती हो

- सा. के. आर. मार्कण्डेय

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