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कतेक सुख चाही ग

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माटी के काया कतेक सुख चाही ग लाखों बटोर ले संग नइ जाही ग चारो मुड़ा आलिशान महल बनाये ग छुटगे मया मन ऊहां तैं धंधाये ग पानी पवन तोला भले मिल जाही ग अपन कुटुम बर बड़े - बड़े जोरा होगे गुरू के बचन इहां सबे मेर कोरा होगे कहे- सुने बर भले मिल जाही ग जिनगी अपन तैं अपने बर जीयत हस लागे न पियास तभू घेरी- बेरी पीयत हस तृष्णा के प्यास भला कब बुझ पाही ग - सा. के. आर. मार्कण्डेय

जग से लड़े के मन होथे

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जग से लड़े के मन होथे हमर गुरू जग से लड़े के मन होथे कोनो झूठ , कपट ,छल बोथे हमर गुरू जग से लड़े के मन होथे

जग से लड़न केहि विधि

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जग से लड़न केहि विधि हमर गुरू जग से लड़न केहि विधि कोनो नइये हमर कलानिधि हमर गुरू जग से लड़न केहि विधि

सतनाम बोल

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प्रथम गुरू घासी दास जयंती के अवसर गाया गया पंथी गीत सतनाम , सतनाम , सतनाम बोल कहे गुरू घासी दास सतनाम बोल गर्भवास म भक्ति कबूले इहंवा आकर उनको भूले काहे भूले कुछ तो बोल सतनाम यह सार जगत में जिनगी के आधार जगत में सत्य बचन सतनाम के मोल सत से धरनी , सत से अगासा  चांद- सुरूज दुई करे परकासा नव लख तारा करे किलोल सतनाम हे घट- घट वासी  कटे बन्द , छूटे चौरासी सतनाम हिरदे म तोल सतनाम साहेब दरसाये हंस उबारन लोक मआये लाखों तरगे सतनाम बोल सत्य बचन बस एक ही जानो सतनाम गहि एक ही मानो जागव साहेब अंखियाँ खोल कहे गुरू घासी दास सतनाम बोल

श्री नकुल देव ढीढी का जन्मोत्सव

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बीरेन्द्र ढीढी रायपुर ने बताया कि १२ अप्रेल २०१८ काे आरंग जिला रायपुर के ग्राम व्योहार में श्री नकुल देव ढीढी की आदम कद प्रतिमा का उद्घाटन माननीय श्री अजीत प्रमोद कुमार जोगी प्रथम मुख्य मंत्री छत्तीसगढ़ के कर कमलों से स सायं ४. ०० बजे सम्पन्न होगा . श्री कैलाश महिलांग आत्मज स्व. मेहतरु राम महिलांग से चर्चा कर आने- जाने की व्यवस्था करना है . यही बात कल अधिवक्ता श्री तामस्कर टंडन जी ने भी बताई थी . फोन किया परन्तु उठाया नहीं .दुबारा फोन किया तो बताया कि वे केस के सिलसिले में जगदलपुर जा रहें हैं .                मंत्री जी श्री नकुल देव ढीढी जी की यह तीसरी प्रतिमा है . एक प्रतिमा ६ वर्ष पूर्व तुमगाँव में लगाई गई .इसे सुप्रयसिद्ध मूर्तिकार नेल्सन ने गढ़ा था . दूसरी  प्रतिमा रायपुर में बनी . जिसे दुर्ग जिले में ग्राम भटगाँव में स्थापित किया गया . २६ जनवरी २०१८ को प्रतिमा का उद ्घाटन हुआ .  तीनों कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मान्यवर अजीत जोगी ही रहें . समाज का उनके प्रति असीम लगाव है . जोगी जी इस बात को जानते हैं और मानते हैं . उन्होंने मंत...

कंदरत रइथे मोर चोला

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कहुं गोली चलत हे , कहुं गोला ग कंदरत रइथे मोर चोला ग रोज उजरत हे बस्ती टोला ग कंदरत रइथे मोर चोला ग ये सोनहा- सोनहा माटी हमर ए काकर आँखी फूटत हे ओनहा- कोनहा सपटे हे बइरी गुड़ कस मांखी लूटत हे धरती के बेचावत हे डोला ग कंदरत रइथे मोर चोला ग बड़े- बडे़ व्यापारी हे , अउ बडे़ - बडे़ जुआरी हे नान- नान इहां मनखे हे उंकर बर अंधियारी हे जिंकर बानी अबोला ग कंदरत रइथे मोर चोला ग हम दुनिया ल का मांगत हन तुम तो बइरी जागे हव हम तो अभी जागत हन  नइ जागे ए हमर भोला ग कंदरत रइथे मोर चोला ग - सा. के. आर. मार्कण्डेय

नकुल ढीढी तोर बाना ल कोन बांधही

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नकुल ढीढी तोर बाना ल कोन बांधही मुरहा- पोटरा बर सीना ल कोन तानही सबके घर म बड़े- बड़े काम हे दुनिया देखाये बर ऊँचा- ऊँचा नाम हे हमर पीरा लुकाना ल कोन जानही सबके मति म इहां बड़े- बड़े ज्ञान हे जतर- कतर रेंगे अनते धियान हे तोर कहना के दाना ल कोन जानही कोन ल कहन , तुम करोग सियानी ल कोन ल धरावन हम तुंहर निशानी ल तोर बदले जमाना ल कोन जानही तुंहर सहारा सब जग अगुवागे चिमटी असन पा मनखे भुलागे तुंहर दागे निशाना ल कोन जानही - सा. के. आर. मार्कण्डेय